जज़्बात यहाँ क्या मिलेगा ?

दोस्तों यहाँ मिलेंगे आपको वो जज़्बात जो कभी आसमान से भी ऊँचे हैं, तो कभी सागर से भी गहरे, कभी पर्वत की तरह अटल हैं, तो कभी पवन से भी चंचल...इस ब्लॉग पर मेरी पसंद की कुछ गजलों का संकलन है, कुछ विचार हैं ....जिस पर मेरा किसी प्रकार का कोई दावा नहीं इसके आलावा कुछ मेरा लिखा है मकसद सिर्फ जज्बातों को बयाँ करना है...उम्मीद है आपको पसंद आएगा|

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अप्रैल 09, 2012

सिलसिला-ए-जिंदगी



और फिर कृष्ण ने अर्जुन से कहा :-

न कोई भाई, न बेटा, न भतीजा, न गुरु
एक ही शक्ल उभरती है हर आईने में
आत्मा मरती नहीं, जिस्म बदल लेती है 
धड़कन इस सीने की जा छुपती है उस सीने में, 

जिस्म लेते हैं जन्म, जिस्म फ़ना होते हैं
और जो इक रोज़ फ़ना होगा, वह पैदा होगा
इक कड़ी टूटती है, दूसरी बन जाती है 
ख़त्म ये सिलसिला-ए-जिंदगी फिर क्या होगा,

रिश्ते सौ, जज्बे भी सौ, चेहरे भी सौ होते हैं 
फ़र्ज़ सौ चेहरे में शक्ल अपनी ही पहचानता है 
वही महबूब, वही दोस्त, वही एक अजीज़ है
दिल जिसे इश्क, और इदराक अमल मानता है,

जिंदगी सिर्फ अमल, सिर्फ अमल, सिर्फ अमल 
और ये बेदर्द अमल सुलह भी है जंग भी है 
अमन की मोहिनी तस्वीर में हैं जितने भी रंग 
उन्ही रंगों में छुपा खून का इक रंग भी है, 

खौफ के रूप कई होते हैं , अंदाज़ कई 
प्यार समझा है जिसे, खौफ है वो प्यारे नहीं 
उँगलियाँ और गड़ा, और जकड़ और जकड़ 
आज महबूब का बाजू है ये तलवार नहीं, 

जंग रहमत है की लानत, पर सवाल अब न उठा
जंग जब आ ही गयी है सर पर तो रहमत होगी 
दूर से देख न भड़के हुए शोलों का जलाल 
इसी दोज़ख के किसी कोने में जन्नत होगी, 

ज़ख्म खा, ज़ख्म लगा, ज़ख्म हैं किस गिनती में 
फ़र्ज़ ज़ख्मों को भी चुन लेता है फूलों की तरह
न कोई रंज, न राहत, न सिले की परवाह 
पाक हर गर्द से रख दिल को रसूलों की तरह,

न कोई भाई, न बेटा, न भतीजा, न गुरु
एक ही शक्ल उभरती है हर आईने में
आत्मा मरती नहीं, जिस्म बदलती लेती है 
धड़कन इस सीने की जा छुपती है उस सीने में, 

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब...गीता के ज्ञान को इस तरह पढ़ना एक अनोखा अनुभव है, उस एक का ही विस्तार है यह सारा जगत.. उस एक को याद रखते हुए अपने हर फर्ज को यहाँ निभाना है. आभार !

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  2. वाह बहुत खूब !!!!...बहुत ही सुन्दर तर्जुमा किया हैं आपने,..."श्रीमद " का .....

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  3. अच्छी प्रस्तुति के लिये बहुत बहुत बधाई....

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  4. बहुत खूबसूरत अंदाज़ में सार लिख दिया है आपने
    "जीवन का आत्मा मरती नहीं जिस्म बदल लेती है ... "
    सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए आभार आपका

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  5. न कोई भाई, न बेटा, न भतीजा, न गुरु
    एक ही शक्ल उभरती है हर आईने में
    आत्मा मरती नहीं, जिस्म बदलती लेती है
    धड़कन इस सीने की जा छुपती है उस सीने में,

    वाह!!!!!!सुन्दर अनुवाद ,बेहतरीन प्रस्तुति,बहुत अच्छी लगी .....


    RECENT POST...फुहार....: रूप तुम्हारा...

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  6. सच है सिर्फ देह बदलती है...... सार्थक रचना

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया मोनिका जी आपका ।

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  7. इतना ज्ञान.....
    भाई, तुम्हारी तो छुट्टी....!!

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  8. प्रेरणात्‍मक पंक्तियां..अति सुन्दर अभिव्यक्ति है ..

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  9. आप सभी लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया ।

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  10. गीता-सार को ऐसे पढना अलग अनुभव है और एक उम्मीद ..इसी दोखज में कहीं जन्नत भी है ..अच्छी लगी..

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  11. आत्मा मरती नहीं जिस्म बदल लेती है ...
    बधाई अच्छे भाव और रचना के लिए !

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  12. कृष्ण ने अर्जुन से कहा---बहुत गहन संदेश |

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  13. इंसान चाहे अमनपसंद कहलाता है लेकिन उसकी कैफियत और फितरत जंगबाज़ की है. बहुत ही ख़ूबसूरत नज़्म.

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  14. बहुत गहन और प्रभावपूर्ण प्रस्तुति....

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...