जज़्बात- दिल से दिल तक

एक दरिया है ये जज़्बातों का जिसमे लफ़्ज़ों की किश्तियाँ तैरती हैं........... जज़्बात मेरे.....तुम्हारे और हम सबके......एक ज़रिया जिससे जज़्बातों का ये सैलाब एक दिल से दूसरे दिल की दहलीज़ तक पहुँच जाए......लफ़्ज़ों की किश्ती पर सवार ......आओ डूब जाएँ जज़्बात के इस दरिया में.......

अक्टूबर 31, 2012

सिंघा

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प्रिय ब्लॉगर साथियों, आज पहली बार कुछ अलग पेश है 'जज़्बात' पर, क्योंकि जज़्बात से भरा हुआ है इसलिए आप सबसे बाँट रहा हूँ । मेर...
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अक्टूबर 23, 2012

मैं क्या हूँ ?

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प्रिय ब्लॉगर साथियों,  24.10.2012 को अपनी 28वीं सालगिरह के मौके पर इस खुबसूरत दुनिया में अपनी जिंदगी का एक और साल बिताने पर खुदा का श...
42 टिप्‍पणियां:
अक्टूबर 08, 2012

परछाईं

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तिनका तिनका जोड़ कर बनाया था जिसे  इक पल में तुमने उस आशियाँ को आग लगाई, दिया हर क़दम पर मुझे रुसवाइयों का तोहफा  गुनाह था मे...
38 टिप्‍पणियां:
सितंबर 27, 2012

जोगी

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जबसे देखी है झलक मैंने तेरी बन गया हूँ तब से मैं तेरा जोगी, तेरे रहम का हूँ तलबगार कबसे बख्श देगा तो रहमत तेरी होगी, पा ल...
40 टिप्‍पणियां:
सितंबर 19, 2012

परवाज़

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खुले हों जो पँख परिंदे के तो परवाज़ कहाँ रूकती है  पर हम खुद को पिंजरों में गिरफ्तार किये बैठे हैं, वो राह तो सीधी ही मंजिल तक ...
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इमरान अंसारी
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं....सिवाय ज़मीन पर पड़ी उस खाक के सिवा जिसका ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब की रौशनी का मोहताज है.....मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं.....
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