जज़्बात- दिल से दिल तक

एक दरिया है ये जज़्बातों का जिसमे लफ़्ज़ों की किश्तियाँ तैरती हैं........... जज़्बात मेरे.....तुम्हारे और हम सबके......एक ज़रिया जिससे जज़्बातों का ये सैलाब एक दिल से दूसरे दिल की दहलीज़ तक पहुँच जाए......लफ़्ज़ों की किश्ती पर सवार ......आओ डूब जाएँ जज़्बात के इस दरिया में.......

नवंबर 19, 2012

दीदार

›
मन्द बहती सबा में, दरख़्त की छाँव में सूरज की कुछ किरने  उस पुराने पीपल के  पत्तों से छन कर तुम्हारे  चेहरे तक आ रही थी, ...
39 टिप्‍पणियां:
नवंबर 09, 2012

काफ़िला

›
मेरे देखते देखते ही गुज़र गया मेरा काफ़िला मैं बिछड़ कर उससे फिर सफ़र में रह न सका,   कहती थी दुनिया जिस दौलत को जहाँ का हासिल ...
39 टिप्‍पणियां:
अक्टूबर 31, 2012

सिंघा

›
प्रिय ब्लॉगर साथियों, आज पहली बार कुछ अलग पेश है 'जज़्बात' पर, क्योंकि जज़्बात से भरा हुआ है इसलिए आप सबसे बाँट रहा हूँ । मेर...
27 टिप्‍पणियां:
अक्टूबर 23, 2012

मैं क्या हूँ ?

›
प्रिय ब्लॉगर साथियों,  24.10.2012 को अपनी 28वीं सालगिरह के मौके पर इस खुबसूरत दुनिया में अपनी जिंदगी का एक और साल बिताने पर खुदा का श...
42 टिप्‍पणियां:
अक्टूबर 08, 2012

परछाईं

›
तिनका तिनका जोड़ कर बनाया था जिसे  इक पल में तुमने उस आशियाँ को आग लगाई, दिया हर क़दम पर मुझे रुसवाइयों का तोहफा  गुनाह था मे...
38 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
इमरान अंसारी
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं....सिवाय ज़मीन पर पड़ी उस खाक के सिवा जिसका ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब की रौशनी का मोहताज है.....मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं.....
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.