जज़्बात- दिल से दिल तक

एक दरिया है ये जज़्बातों का जिसमे लफ़्ज़ों की किश्तियाँ तैरती हैं........... जज़्बात मेरे.....तुम्हारे और हम सबके......एक ज़रिया जिससे जज़्बातों का ये सैलाब एक दिल से दूसरे दिल की दहलीज़ तक पहुँच जाए......लफ़्ज़ों की किश्ती पर सवार ......आओ डूब जाएँ जज़्बात के इस दरिया में.......

दिसंबर 14, 2012

नाज़ुक सा इश्क़

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कच्चे रेशम के धागे जैसा वो नाज़ुक सा इश्क़........ जो हम दोनों के दरमियाँ आहिस्ते आहिस्ते पला था, उसमें अपने मुस्तकबिल को जवान...
50 टिप्‍पणियां:
दिसंबर 01, 2012

शमां

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प्रिय साथियों......इम्तिहानों का दौर है और पास भी होना है तो वक़्त की दरकार है की कुछ दिनों मेहनत का दामन थाम लिया जाए........इन्ही वजुहा...
37 टिप्‍पणियां:
नवंबर 19, 2012

दीदार

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मन्द बहती सबा में, दरख़्त की छाँव में सूरज की कुछ किरने  उस पुराने पीपल के  पत्तों से छन कर तुम्हारे  चेहरे तक आ रही थी, ...
39 टिप्‍पणियां:
नवंबर 09, 2012

काफ़िला

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मेरे देखते देखते ही गुज़र गया मेरा काफ़िला मैं बिछड़ कर उससे फिर सफ़र में रह न सका,   कहती थी दुनिया जिस दौलत को जहाँ का हासिल ...
39 टिप्‍पणियां:
अक्टूबर 31, 2012

सिंघा

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प्रिय ब्लॉगर साथियों, आज पहली बार कुछ अलग पेश है 'जज़्बात' पर, क्योंकि जज़्बात से भरा हुआ है इसलिए आप सबसे बाँट रहा हूँ । मेर...
27 टिप्‍पणियां:
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इमरान अंसारी
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं....सिवाय ज़मीन पर पड़ी उस खाक के सिवा जिसका ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब की रौशनी का मोहताज है.....मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं.....
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