जज़्बात- दिल से दिल तक

एक दरिया है ये जज़्बातों का जिसमे लफ़्ज़ों की किश्तियाँ तैरती हैं........... जज़्बात मेरे.....तुम्हारे और हम सबके......एक ज़रिया जिससे जज़्बातों का ये सैलाब एक दिल से दूसरे दिल की दहलीज़ तक पहुँच जाए......लफ़्ज़ों की किश्ती पर सवार ......आओ डूब जाएँ जज़्बात के इस दरिया में.......

मार्च 19, 2013

मैं....मेरा दिल.... और मंज़िल

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प्रिय ब्लॉगर साथियों,  आज एक नज़्म पेश-ए-खिदमत है .....इसे दुबारा पोस्ट कर रह हूँ इस उम्मीद में की आप फिर से इसका भरपूर लुत्फ़ लें और...
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फ़रवरी 27, 2013

कस्तूरी

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जहाँ कहीं जिस ओर भी इशारा मिला उसी तरफ उसे ढूँढता रहा बढ़ता रहा  कभी इससे पूछता तो कभी उससे  कहीं कोई सुराग नहीं मिलता था  दू...
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फ़रवरी 20, 2013

अब के बहार

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अब के बहार चुनर मोरी रंग दे...... तूने बख्शी तो दी मुझको ये कोरी  मौला ! हो गई चुनर मोरी मैली,  अब के बहार चुनर मोरी रंग ...
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फ़रवरी 12, 2013

हासिल

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कभी खीझकर बाहर के शोर से कान बंद कर लेता हूँ तो अपने ही भीतर का शोर मुझे पागल बनाने लगता है, इस दौर में वही कामयाबी की मंजिल तक...
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फ़रवरी 04, 2013

ख़ुशी

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वो सब साथ-साथ ही बढ़ रहे थे, मेरी जिंदगी के आँगन में,  रहम, हमदर्दी और इंसानियत  सबसे छोटी और मासूम थी  'ख़ुशी' नाम क...
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इमरान अंसारी
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं....सिवाय ज़मीन पर पड़ी उस खाक के सिवा जिसका ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब की रौशनी का मोहताज है.....मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं.....
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