जज़्बात- दिल से दिल तक

एक दरिया है ये जज़्बातों का जिसमे लफ़्ज़ों की किश्तियाँ तैरती हैं........... जज़्बात मेरे.....तुम्हारे और हम सबके......एक ज़रिया जिससे जज़्बातों का ये सैलाब एक दिल से दूसरे दिल की दहलीज़ तक पहुँच जाए......लफ़्ज़ों की किश्ती पर सवार ......आओ डूब जाएँ जज़्बात के इस दरिया में.......

सितंबर 23, 2013

आँखें

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एक ऐसे शख्स के लिए जिसकी आँखे कुछ कहने के लिए बेक़रार कर जाती है। ……मेरी तरफ से ये प्यार भरा तोहफा खूबसूरत आँखों की उस मल्लिका  के लिए - ...
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सितंबर 16, 2013

इंतज़ार

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ज़ख्म रिसने लगते हैं दर्द बहने लगता है  आँखे अश्कों में  भीग जाती हैं आज भी, जब-जब उस शब  का ज़िक्र आता है  जो तेरे इंतज़ा...
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सितंबर 09, 2013

बचपन

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जिंदगी का वो हसीं दौर लौटा दे  ए ! वक़्त मुझे मेरा बचपन लौटा दे…… जब माँ के आँचल में छुप जाता था जब न किसी गम से मेरा नाता थ...
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अगस्त 31, 2013

तामीर

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अपनी हसरतों के गारे से  उम्मीदों की ईंटों की चुनाई कर  यकीन की बुनियाद पर 'रिश्तों' की ईमारत तामीर की थी मैंने,   इश...
17 टिप्‍पणियां:
अगस्त 17, 2013

पूरे चाँद की अधूरी रात

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वो पूरे चाँद की एक अधूरी सी रात, जो जिंदगी में ठहर सी गई है,   वो दरिया का किनारा  पूरे चाँद की नीली सी रौशनी  जो दरिया के...
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इमरान अंसारी
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं....सिवाय ज़मीन पर पड़ी उस खाक के सिवा जिसका ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब की रौशनी का मोहताज है.....मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं.....
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