जज़्बात- दिल से दिल तक

एक दरिया है ये जज़्बातों का जिसमे लफ़्ज़ों की किश्तियाँ तैरती हैं........... जज़्बात मेरे.....तुम्हारे और हम सबके......एक ज़रिया जिससे जज़्बातों का ये सैलाब एक दिल से दूसरे दिल की दहलीज़ तक पहुँच जाए......लफ़्ज़ों की किश्ती पर सवार ......आओ डूब जाएँ जज़्बात के इस दरिया में.......

नवंबर 30, 2013

याद

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रात फिर आयी थी याद तेरी  रोती रही, गिड़गिड़ाती रही  हिचकियों की आवाज़ें  मेरे कानों में गूँजती रही    ज़ेहन की देहरी से लगी तेरी...
21 टिप्‍पणियां:
नवंबर 26, 2013

कागज़ की नाव

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अरमानों को मोड़कर हसरतो को जोड़कर, एक कश्ती बनाई थी मैंने और ये सोच कर पानी में बहा दी कि एक रोज़ इसे साहिल मिलेगा, मेरे दिल ...
10 टिप्‍पणियां:
नवंबर 19, 2013

साहिल

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आज भी जा बैठती हूँ  सागर के उसी साहिल पर  जहाँ बैठे घंटो हम दूर  अस्त होते सूरज को  निहारा करते थे,  इन लहरों पर कितनी ह...
14 टिप्‍पणियां:
अक्टूबर 28, 2013

लाज

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इस खुबसूरत पेंटिंग को देखकर दिल से निकले कुछ ख्याल :- नैनो में डाल के कजरा  केशों में बाँध के गजरा, बल खा के चली मैं आज जग...
19 टिप्‍पणियां:
अक्टूबर 21, 2013

वक़्त

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उम्र गुज़रती रही ज़िन्दगी कटती रही  हर मोड़ पर यहाँ कहानी बदलती रही,  एक ख़ुशी की खातिर मैं तड़पता रहा  और वक़्त जैसे पँख लगाक...
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इमरान अंसारी
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं....सिवाय ज़मीन पर पड़ी उस खाक के सिवा जिसका ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब की रौशनी का मोहताज है.....मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं.....
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