जज़्बात- दिल से दिल तक

एक दरिया है ये जज़्बातों का जिसमे लफ़्ज़ों की किश्तियाँ तैरती हैं........... जज़्बात मेरे.....तुम्हारे और हम सबके......एक ज़रिया जिससे जज़्बातों का ये सैलाब एक दिल से दूसरे दिल की दहलीज़ तक पहुँच जाए......लफ़्ज़ों की किश्ती पर सवार ......आओ डूब जाएँ जज़्बात के इस दरिया में.......

फ़रवरी 12, 2014

प्यार और प्यार

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दोस्तों, आप सभी का शुक्रिया जो 'चल यार मनाएंगे' आपको पसंद आई । कुछ लोगों ने कहा और खुद मुझे भी लगा कि इसे धुन में पिरो कर गुनगुना...
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फ़रवरी 01, 2014

चल यार मनाएंगे

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मिसरा एक सूफी कव्वाली का  'चल यार मनाएं' सुना था कहीं । उसके गिर्द एक सूफियाना क़लाम बुना है, इसमें सिर्फ इस एक मिसरे के सिवा बाक...
25 टिप्‍पणियां:
जनवरी 24, 2014

अवसाद (डिप्रेशन) और उसके बाद - मेरा अनुभव

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अवसाद, एक ऐसा शब्द जो भीतर तक सिहरन पैदा कर देता है । इसे न जानने वालों के लिए ये एक शब्द मात्र ही है परन्तु इसकी विभीषका से वही परि...
34 टिप्‍पणियां:
जनवरी 18, 2014

समंदर

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समंदर के किनारे दूर तक फैली रेत पर  ताड़ के पेड़ से पीठ टिका  मैं  देखता रहा सोचता रहा विराट में छुपे कितने संकेत,  हज़ारो ...
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दिसंबर 30, 2013

स्माइल प्लीज़

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दोस्तों आज पहली बार ज़रा 'हास्य' में कुछ लिखा है । आपके सामने पेश है.... । अच्छा- बुरा जैसा भी लगे ज़रूर बताएं।  कसौटी होगी आपकी मुस...
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इमरान अंसारी
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं....सिवाय ज़मीन पर पड़ी उस खाक के सिवा जिसका ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब की रौशनी का मोहताज है.....मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं.....
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