जज़्बात- दिल से दिल तक

एक दरिया है ये जज़्बातों का जिसमे लफ़्ज़ों की किश्तियाँ तैरती हैं........... जज़्बात मेरे.....तुम्हारे और हम सबके......एक ज़रिया जिससे जज़्बातों का ये सैलाब एक दिल से दूसरे दिल की दहलीज़ तक पहुँच जाए......लफ़्ज़ों की किश्ती पर सवार ......आओ डूब जाएँ जज़्बात के इस दरिया में.......

मई 30, 2014

अहसास

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दोस्तों, आप सबको सलाम अर्ज़ करता हूँ और इस बात के लिए माफ़ी का तलबगार हूँ कि एक लम्बे अरसे से ब्लॉगर से गैरहाजिर रहा । कुछ मसरूफियत की व...
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अप्रैल 14, 2014

दर्द भरी रात

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कितनी कराहों  चीखों में घिरी  दर्द भरी रात, भटक रही थी,  सदियों से मिलन  को उजाले से,   स्याह अँधेरे से दामन बचाती...
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अप्रैल 04, 2014

मीठा सा इश्क

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दोस्तों, सबसे पहले तो आप सबसे माफ़ी चाहूँगा । पिछले दिनों अति व्यस्तता के चलते स्वयं अपने और आप सभी के ब्लॉग तक आना नहीं हो पाया | सोशल...
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मार्च 13, 2014

लफ्ज़

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गुमशुदा से लफ्ज़  आते हैं ज़ेहन  की दहलीज़ तक, और कुछ देर  टहलते भी है  ख्यालों के साथ, कागज़ पर उन्हें  बाँधने की कोश...
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फ़रवरी 12, 2014

प्यार और प्यार

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दोस्तों, आप सभी का शुक्रिया जो 'चल यार मनाएंगे' आपको पसंद आई । कुछ लोगों ने कहा और खुद मुझे भी लगा कि इसे धुन में पिरो कर गुनगुना...
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इमरान अंसारी
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं....सिवाय ज़मीन पर पड़ी उस खाक के सिवा जिसका ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब की रौशनी का मोहताज है.....मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं.....
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