जज़्बात- दिल से दिल तक

एक दरिया है ये जज़्बातों का जिसमे लफ़्ज़ों की किश्तियाँ तैरती हैं........... जज़्बात मेरे.....तुम्हारे और हम सबके......एक ज़रिया जिससे जज़्बातों का ये सैलाब एक दिल से दूसरे दिल की दहलीज़ तक पहुँच जाए......लफ़्ज़ों की किश्ती पर सवार ......आओ डूब जाएँ जज़्बात के इस दरिया में.......

जून 25, 2014

किनारा

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न तो इस किनारे ही जीवन है  और न ही उस किनारे पर  अरसे से रुके हुए थमे हुए ये  किनारे कभी कहीं नहीं पहुँचते, दोनों ही किनारों ...
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जून 17, 2014

पहला पैगाम

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महबूब के नाम मैं  पहला पैगाम लिखूँ,  चूड़ियाँ वो खनकती  पायल वो झनकती  साँसे वो महकती  या तेरी होठो के वो  छलकते जाम लि...
10 टिप्‍पणियां:
जून 04, 2014

कृष्ण

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"कृष्ण'' इस पौराणिक चरित्र ने हमेशा से मुझे प्रभावित किया है | कृष्ण के दर्शन में एक जो विरोधाभास है वो वाकई आकर्षण का केंद...
10 टिप्‍पणियां:
मई 30, 2014

अहसास

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दोस्तों, आप सबको सलाम अर्ज़ करता हूँ और इस बात के लिए माफ़ी का तलबगार हूँ कि एक लम्बे अरसे से ब्लॉगर से गैरहाजिर रहा । कुछ मसरूफियत की व...
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अप्रैल 14, 2014

दर्द भरी रात

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कितनी कराहों  चीखों में घिरी  दर्द भरी रात, भटक रही थी,  सदियों से मिलन  को उजाले से,   स्याह अँधेरे से दामन बचाती...
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इमरान अंसारी
मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं....सिवाय ज़मीन पर पड़ी उस खाक के सिवा जिसका ज़र्रा ज़र्रा आफ़ताब की रौशनी का मोहताज है.....मैं क्या हूँ ? कुछ भी तो नहीं.....
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