कोहरे से घिरी सर्द रातों में अक्सर
यूँ भी घर से निकलता हूँ ये सोचकर
कि मेरी ही तरह चाँद को भी
अहसास-ए-तन्हाई सताती होगी,
ठिठुरती हुई इन गलियों में
आवारा चाँदनी भटकती होगी,
गर्म दुशाले में लिपटी वो कहीं
अलाव से हाथों को सेकती
मेरी याद में तड़पती होगी,
अहसासों की गर्म तपिश के सहारे
साँसों के गर्म उजले धुएँ की रौशनी में,
धुंध को चीरता मैं चला जाता हूँ
एक सिर्फ तेरी ही तलाश में,
दूर कहीं कुछ साये से लहराते हैं
दामन का तेरे अहसास कराते है,
कहीं कोई दीप झिलमिलाता है
मिलन की एक आस जगाता है,
कहीं कुछ नज़र नहीं आता
अपने ही क़दमों कि आवाज़ें हैं,
इस सिरे से उस सिरे तक सिर्फ
सफ़ेद कोहरे कि परवाज़ें हैं,
मेरी ही तरह ये चाँद भी जलता है
कैसा मेरा और इसका रिश्ता है,
रजाइयों में दुबक जब सोता है जहाँ
आशिक़ पिया मिलन को तरसता है,
कोहरे से घिरी सर्द रातों में अक्सर
यूँ भी घर से निकलता हूँ ये सोचकर
कि मेरी ही तरह चाँद को भी
अहसास-ए-तन्हाई सताती होगी,
© इमरान अंसारी

आप की ये सुंदर रचना आने वाले सौमवार यानी 09/12/2013 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित है...
जवाब देंहटाएंसूचनार्थ।
एक मंच[mailing list] के बारे में---
अपनी किसी भी ईमेल द्वारा ekmanch+subscribe@googlegroups.com
पर मेल भेजकर जुड़ जाईये आप हिंदी प्रेमियों के एकमंच से।हमारी मातृभाषा सरल , सरस ,प्रभावपूर्ण , प्रखर और लोकप्रिय है पर विडंबना तो देखिये अपनों की उपेक्षा का दंश झेल रही है। ये गंभीर प्रश्न और चिंता का विषय है अतः गहन चिंतन की आवश्यकता है। इसके लिए एक मन, एक भाव और एक मंच हो, जहाँ गोष्ठिया , वार्तालाप और सार्थक विचार विमर्श से निश्चित रूप से सकारात्मक समाधान निकलेगे इसी उदेश्य की पूर्ति के लिये मैंने एकमंच नाम से ये mailing list का आरंभ किया है। आज हिंदी को इंटरनेट पर बढावा देने के लिये एक संयुक्त प्रयास की जरूरत है, सभी मिलकर हिंदी को साथ ले जायेंगे इस विचार से हिंदी भाषी तथा हिंदी से प्यार करने वाले सभी लोगों की ज़रूरतों पूरा करने के लिये हिंदी भाषा , साहित्य, चर्चा तथा काव्य आदी को समर्पित ये संयुक्त मंच है। देश का हित हिंदी के उत्थान से जुड़ा है , यह एक शाश्वत सत्य है इस मंच का आरंभ निश्चित रूप से व्यवस्थित और ईमानदारी पूर्वक किया गया है। हिंदी के चहुमुखी विकास में इस मंच का निर्माण हिंदी रूपी पौधा को उर्वरक भूमि , समुचित खाद , पानी और प्रकाश देने जैसा कार्य है . और ये मंच सकारात्मक विचारो को एक सुनहरा अवसर और जागरूकता प्रदान करेगा। एक स्वस्थ सोच को एक उचित पृष्ठभूमि मिलेगी। सही दिशा निर्देश से रूप – रेखा तैयार होगी और इन सब से निकलकर आएगी हिंदी को अपनाने की अद्भ्य चाहत हिंदी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाना, तकनिकी क्षेत्र, विज्ञानं आदि क्षेत्रो में विस्तार देना हम भारतीयों का कर्तव्य बनता है क्योंकि हिंदी स्वंय ही बहुत वैज्ञानिक भाषा है हिंदी को उसका उचित स्थान, मान संमान और उपयोगिता से अवगत हम मिल बैठ कर ही कर सकते है इसके लिए इस प्रकार के मंच का होना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हमारी एकजुटता हिंदी को फिर से अपने स्वर्ण युग में ले जायेगी। वर्तमान में किया गया प्रयास , संघर्ष , भविष्य में प्रकाश के आगमन का संकेत दे देता है। इस मंच के निर्माण व विकास से ही वो मुहीम निकल कर आयेगी जो हिंदी से जुडी सारे पूर्वग्रहों का अंत करेगी। मानसिक दासता से मुक्त करेगी और यह सिलसिला निरंतर चलता रहे, मार्ग प्रशस्त करता रहे ताकि हिंदी का स्वाभिमान अक्षुण रहे।
अभी तो इस मंच का अंकुर ही फुटा है, हमारा आप सब का प्रयास, प्रचार, हिंदी से स्नेह, हमारी शक्ति तथा आत्मविश्वास ही इसेमजबूति प्रदान करेगा।
ज आवश्यक्ता है कि सब से पहले हम इस मंच का प्रचार व परसार करें। अधिक से अधिक हिंदी प्रेमियों को इस मंच से जोड़ें। सभी सोशल वैबसाइट पर इस मंच का परचार करें। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा। ये केवल 1 या 2 के प्रयास से संभव नहीं है, अपितु इस के लिये हम सब को कुछ न कुछ योगदान अवश्य करना होगा।
तभी संभव है कि हम अपनी पावन भाषा को विश्व भाषा बना सकेंगे।
एक मंच हम सब हिंदी प्रेमियों, रचनाकारों, पाठकों तथा हिंदी में रूचि रखने वालों का साझा मंच है। आप को केवल इस समुह कीअपनी किसी भी ईमेल द्वारा सदस्यता लेनी है। उसके बाद सभी सदस्यों के संदेश या रचनाएं आप के ईमेल इनबौक्स में प्राप्त कर पाएंगे कोई भी सदस्य इस समूह को सबस्कराइब कर सकता है। सबस्कराइब के लिये
आप यहां क्लिक करें
या
ekmanch+subscribe@googlegroups.com
पर मेल भेजें।
इस समूह में पोस्ट करने के लिए,
ekmanch@googlegroups.com
को ईमेल भेजें
[आप सब से भी मेरा निवेदन है कि आप भी इस मंच की सदस्यता लेकर इस मंच को अपना स्नेह दें तथा इस जानकारी को अपनी सोशल वैबसाइट द्वारा प्रत्येक हिंदी प्रेमी तक पहुंचाएं। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा
हमारे ब्लॉग कि पोस्ट को यहाँ शामिल करने का बहुत बहुत शुक्रिया |
हटाएंबहुत खूब .... ये कैसी तन्हाई है चाँद की ... तारों का साथ भी जैसे होकर नहीं होता ... उनकी यादें होती हैं पर उनका साथ नहीं होता ... गहरी नज़्म प्रेम का एहसास लिए ...
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया दिग्मबर जी |
हटाएंदिल की गहराइयों से निकली पंक्तियाँ...तनहाई का अहसास ही कितना कोमल है...चाँदनी जैसा...
जवाब देंहटाएंतहेदिल से शुक्रिया अनीता जी ।
हटाएंमन के भावों का सुंदर चित्रण .....
जवाब देंहटाएंशुक्रिया मोनिका जी ।
हटाएंगुनगुनाने का मन हो रहा है ..फिर-फिर पढ़कर.. वाह! बहुत ही बढ़िया..
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया अमृता जी |
हटाएंभावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने...
जवाब देंहटाएंशुक्रिया सुषमा |
हटाएंसुंदर भावों की अभिव्यक्ति !!
जवाब देंहटाएंशुक्रिया रंजना जी |
हटाएंवाह...बहुत उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
जवाब देंहटाएंनयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी
शुक्रिया प्रसन्न जी |
हटाएंआशाएं जीवन का आधार हैं ! मंगलकामनाएं आपको !
जवाब देंहटाएंहौसलाअफ़ज़ाई का शुक्रिया सतीश जी |
हटाएंबेमिसाल रचना. ह्रदय में उतरते शब्द. जिस तरह पथिक तम चीरते गतिमान है ..तो लौ तो जलना ही है अँधेरे में.
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया निहार भाई
हटाएंबहुत भावपूर्ण रचना...बहुत सुन्दर...
जवाब देंहटाएं