दोस्तों,
सबसे पहले तो आप सबसे माफ़ी चाहूँगा । पिछले दिनों अति व्यस्तता के चलते स्वयं अपने और आप सभी के ब्लॉग तक आना नहीं हो पाया | सोशल मीडिया कि तस्वीर पिछले कुछ समय से काफी बदल गई है फेसबुक जैसे त्वरित प्रतिक्रिया वाले प्लेटफार्म पर आवाजाही बढ़ी है तो ब्लॉगजगत में कमी आई है । पर इन सबके बावजूद ब्लॉग का अपना नशा है...... जो ठहराव और इत्मीनान से पोस्ट पढ़ कर ईमानदाराना टिप्पणियों से होकर लेखक और पाठक को जोड़ता है । हरसंभव प्रयास रहेगा कि जल्द ही समय निकल कर आप सबके ब्लॉग तक पहुँच सकूँ और कुछ बेहतर और नवीन पढ़ने को मिल सके । आज ये एक छोटी सी नज़्म पेश है आप सबके लिए :-
तेरे तसव्वुर में डूबी
ख़ुमार से भरी आँखे
कुछ ख्वाब बुनती हैं,
जिनकी तासीर लबों पर
चाशनी सी उतरती है,
क़तरा-क़तरा रूह तक
मीठा सा इश्क बहता है,
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इसके आलावा 'जनसेवा मेल, झाँसी' में पहली बार मेरी कृति को शामिल किया गया है । जिसके लिए दिल से शुक्रिया । अपने लिखे को प्रकाशित हुए देखने की ख़ुशी अलग ही होती है और वो भी पहली बार तो दोस्तों आप सब भी शरीक हो ।