सितंबर 01, 2026

जज़्बात — दिल से दिल तक : एक ब्लॉग से किताब तक

कुछ सफ़र मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि अपने पीछे छूटे हुए रास्तों को फिर से देखने के लिए भी होते हैं।

साल 2010 में मैंने ये ब्लॉग शुरू किया था—“जज़्बात — दिल से दिल तक”।

उस समय शायद यह खयाल भी नहीं था कि इस नाम से शुरू हुआ एक छोटा-सा ब्लॉग, इतने बरसों बाद एक किताब का नाम बन जाएगा।

शुरुआत के दिनों में अपनी शायरी इसी ब्लॉग पर साझा किया करता था। जो कुछ दिल में आता, उसे अल्फ़ाज़ देता और यहाँ रख देता। धीरे-धीरे ग़ज़लें, नज़्में और अशआर इस ब्लॉग का हिस्सा बनते गए। समय आगे बढ़ता रहा, बहुत कुछ बदलता रहा, लेकिन वे अल्फ़ाज़ यहीं अपनी जगह बनाए रहे।

आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ तो यह बात अपने आप में बड़ी सुखद लगती है कि जिस नाम से 2010 में ब्लॉग शुरू किया था, उसी नाम से अब मेरी पहली शायरी की किताब प्रकाशित हुई है।

 

यह किताब मेरे लिए केवल कुछ रचनाओं का संग्रह नहीं है। इसमें उन वर्षों के कुछ एहसास, कुछ यादें, कुछ रिश्ते और कुछ अनकहे जज़्बात भी शामिल हैं, जिन्हें कभी शेर, कभी नज़्म और कभी ग़ज़ल का रूप मिला इसलिए इस किताब का इस ब्लॉग से एक रिश्ता हमेशा बना रहेगा। इस ब्लॉग पर मेरी कई पुरानी शायरियाँ आज भी मौजूद हैं। किताब के पन्नों में जो कुछ समेट पाया, वह इस लंबे सफ़र का एक हिस्सा है; बाकी अल्फ़ाज़ आज भी यहीं बिखरे हुए हैं।

आज खुशी है कि “जज़्बात — दिल से दिल तक” अब किताब की शक्ल में भी आपके सामने है।

 

किताब eBook, Paperback और Hardcover में उपलब्ध है:

Kindle eBook

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Amazon Paperback & Hardcover

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Flipkart Paperback

https://www.flipkart.com/jazbaat/p/itm5351e162e48ab?pid=9798906737366&affid=editornoti

Notion Press Paperback

https://direct.notionpress.com/in/read/jazbaat-dil-se-dil-tak

 

अगर इन अल्फ़ाज़ में आपको अपना कोई एहसास, कोई याद या अपनी कहानी का कोई हिस्सा दिखाई दे, तो किताब को ज़रूर पढ़िएगा। पढ़कर अपनी राय भी साझा कीजिएगा। एक पाठक की सच्ची प्रतिक्रिया किसी भी लेखक के लिए बहुत मायने रखती है।

उन सभी दोस्तों, पाठकों और शुभचिंतकों का दिल से शुक्रिया, जिन्होंने इस सफ़र में कभी पढ़कर, कभी सराहकर और कभी हौसला देकर साथ दिया।

उम्मीद है कि आपका साथ आगे भी बना रहेगा और जज़्बात यूँ ही आगे चलता रहेगा। नया भी साझा होता रहेगा।

 

© इमरान अंसारी

 

अगस्त 12, 2026

सच्चा दोस्त

दोस्तों आप सभी को सलाम अर्ज़ करता हूँ। आज लगभग 10 सालों के बाद इस ब्लॉग पर पोस्ट कर रहा हूँ। कुछ तो ज़िन्दगी की मसरूफियात रही हैं कुछ वक्त की किल्लत। एक लम्बे अरसे के बाद ब्लॉग को खोलकर देखा तो यकीन जानिए कि इतनी खुशी हुई कि ये अभी भी लाइव है और लोग जुड़े हैं। ये ब्लॉग हमेशा से मेरे दिल के करीब और खास रहा है। 

आप सभी दोस्तों के नाम आज ये कविता पेश है। कविता का शीर्षक है 'सच्चा दोस्त'। हमेशा की तरह आपकी अमूल्य टिप्पणियों और सुझावों का इंतज़ार रहेगा। पूरी कोशिश रहेगी कि ये सिलसिला आगे भी यूँ ही चलता रहे।

अच्छा जिसका नसीब होता हैदोस्त उसके करीब होता है,

जो साथ हँसता और रोता हैसच्चा दोस्त वही होता है, 

राह में पड़ते हो काँटे अगरहटा के उन्हें फूल वो बोता है

दिल गर कभी उदास हो तोसाथ अपना भी चैन खोता है,


होती हैं जब आँखें गम से नमदोस्त भी पलकें भिगोता है,

जब दुनिया पराई सी लगती हैबनके साया साथ होता है , 

बचपन की शरारते हों या जवानी की समझाइशें

हर घड़ी साथ रहता है और सबको ही ढोता है

 

कमियाँ हमारी वो सामने हमारे ही बतलाता है

राह गलत अगर लगे तो सही राह दिखाता है 

कभी रूठ जाए अगर कहीं, तो झट मान भी जाता है

कोई जो पूछे तो कह दूँ, दोस्त ऐसा ही होता है 

© इमरान अंसारी 


सितंबर 29, 2016

ज़िल्लत



खर्च करते हैं जो अपना माल ख़ुदा की राह में
उनको ज़िन्दगी में कभी किल्लत नहीं होती,
और करते हैं जो अपने बुज़ुर्गों की इज़्ज़त
इस जहाँ में कभी उनकी ज़िल्लत नहीं होती,

©इमरान अंसारी
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*किल्लत - कमी, *ज़िल्लत -बेइज़्ज़ती

सितंबर 26, 2016

सावन


पल-पल बदलता है जीवन मौसम हो जैसे
धूप ही धूप है बस, छाँव कुछ ही अरसा है
बहार फ़क़त तेरी आँखों का इक धोखा है
ये वो सावन है जो मेरी आँखों से बरसा है,

© इमरान अंसारी

मई 09, 2015

दौर-ए-गर्दिश



लगता है सुलझाने में ही बीतेगी तमाम उम्र 
उलझी है जिंदगी किसी सवालात की तरह,

ज़ाहिर करता है ऐसे पहचानता नहीं मुझे 
मिलता है हर बार पहली मुलाक़ात की तरह,

बदले-बदले से उसके तेवर नज़र आते हैं,
वो भी बदल रहा है जैसे हालात की तरह,

कर सके तो कर वफ़ा मेरी वफ़ा की बदले 
नहीं चाहिए मुहब्बत मुझे खैरात की तरह

क्यूँ दौर-ए-गर्दिश से घबरा न जाये दिल 
गम बढ़े आते है किसी बारात की तरह,

© इमरान अंसारी