जिंदा रहना है यहाँ अगर
तो चुप ही रहना सीखो........
कोई नहीं सुनता है
गरीबों की सदा यहाँ
यहाँ सुनी जाती है सिर्फ
सिक्को की आवाजें,
रह जाती हैं अपनी जगह
खड़ी हुई ईमानदारी
आगे बढ़ जाती हैं यहाँ
खुशामद से भरी आवाजें,
नाले में मिलती लाशें
गले के साथ ही साथ
काट दी जाती हैं यहाँ
बगावत से भरी आवाजें,
गला फाड़-फाड़ कर
चिल्लाता है यहाँ झूठ
और दबा दी जाती हैं
सच से भरी आवाजें,
कानून हो मुल्क का या
फिर भरी हुई अदालत
फरियादों को रौंद देती हैं
यहाँ रौब से भरी आवाजें,
जिंदा रहना है यहाँ अगर
तो चुप ही रहना सीखो........
आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी यह विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज (शुक्रवार, ७ जून, २०१३) के ब्लॉग बुलेटिन - घुंघरू पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया आपका तुषार जी......
हटाएंलेकिन ऐसे जिन्दा रहना तो मरने से भी बदतर होगा...
जवाब देंहटाएंसही कहा अनीता जी......पर मुल्क में अब आधी से ज्यादा आबादी ऐसे ही जी रही है ।
हटाएंआपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार(8-6-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
जवाब देंहटाएंसूचनार्थ!
बहुत बहुत शुक्रिया वंदना जी जज़्बात की पोस्ट को जगह देने का ।
हटाएंशानदार,उम्दा प्रस्तुति,,,
जवाब देंहटाएंRECENT POST: हमने गजल पढी, (150 वीं पोस्ट )
आपकी यह रचना कल शुक्रवार (08-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत शुक्रिया अरुण जी जज़्बात की पोस्ट को जगह देने का ।
हटाएंदुनिया के नक्कारखानें में तूती की आवाज़ कौन सुनता है !
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर इमरान भाई. जो लोग कमजोर है अपने यहाँ, उन्हें आपके रचना के सन्देश से बार-बार अवगत कराया जाता है.
जवाब देंहटाएंएक बड़ा नक्कारखाना है ये दुनिया -यहाँ तूती की आवाज़ कौन सुनता है !
जवाब देंहटाएंवाह ...बहुत सुन्दर रचना ....फुर्सत के पल मेरे यहाँ भी पधारे
जवाब देंहटाएंपर यही चुप्पी जब टूटती है तो क़यामत भी ले आती है..
जवाब देंहटाएंसच में बहुत दुखद स्तिथि है...बहरों के बीच चुप रहना शायद उचित है आज के हालात में जीने के लिए..
जवाब देंहटाएंये चुप्पी तो सब खत्म कर देगी...बोलना जरूरी है
जवाब देंहटाएंwah imranji mujuda haal ko bakhubi byan kiya hein..
जवाब देंहटाएंmagar awaz uthana bhi nhi choda krte...!!!
बहुत बड़े सच को सहज ही कह दिया है आपने इस नज़म में ...
जवाब देंहटाएंहालांकि बहुत मुश्किल है ऐसा कर पाना ...
Sarthak Rachna...
जवाब देंहटाएंआप सभी लोगों का तहेदिल से शुक्रिया ।
जवाब देंहटाएंमज़बूत कलम के लिए बधाई !
जवाब देंहटाएंशुक्रिया सक्सेना साहब ।
हटाएंपिछले दिनों नेट की गडबडी की वजह से कई जगह कमेन्ट नहीं कर पाई ....आज एक साथ आपकी साडी रचनाएँ पढ़ रही हूँ ....
जवाब देंहटाएंआजकल का कच्चा चिठ्ठा है ये ....बहुत अच्छी रचना ....!!
लाख सवालों का एक जवाब ....चुप्पी ....जो समझने वाले के लिए इशारे का काम करती है
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