अक्टूबर 04, 2026

इबादत

 


कैसे बांध सकेगा तू! बंदे हर चीज़ आनी-जानी है,


नहीं रहेगा कुछ कायम यहाँ हर शय फ़ानी है,


बिता ले इबादत में इसे चार दिन की ज़िंदगानी है


आज ही आज है फ़क़त कल तो बस कहानी है,


© इमरान अंसारी

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