कैसे बांध सकेगा तू! बंदे हर चीज़ आनी-जानी है,
नहीं रहेगा कुछ कायम यहाँ हर शय फ़ानी है,
बिता ले इबादत में इसे चार दिन की ज़िंदगानी है
आज ही आज है फ़क़त कल तो बस कहानी है,
© इमरान अंसारी
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