जुलाई 06, 2013

बारिश


आज फिर आई थी बारिश 
हर बार की तरह..........

मेरी खिड़की के दरवाज़ों पर,
बहुत देर तक खटखटाती रही
अन्दर तक आ जाने के लिए,

और मैं, किसी ख्याल में ग़ुम 
अपने ज़ेहन की कोठरी में 
किसी याद से बंधा पड़ा था,

जब तक मैं खिड़की पर आया
तो काफी देर इंतज़ार करके 
वो मायूस होकर लौट गई थी ,

जाते-जाते खिड़की के काँच पर 
मेरे लिए अँगुली से लिखा  
एक संदेसा छोड़ गई थी,

इन सीलन भरी कोठरियों में
तुम्हारा दम घुट जाता होगा,
मेरी बौछारें तुम्हें जिंदा रखेंगी,

कब तक मुझसे बचते रहोगे
फिर आऊँगी अगले बरस,
तुम्हें अन्दर तक भिगोने को,

कहती थी पगली कि तुम्हें
उस 'जहाँ' कि सैर कराऊँगी 
जहाँ सिर्फ बारिश ही नहीं बल्कि 
अल्लाह कि नेमतें बरसती हैं,   

आज फिर आई थी बारिश 
हर बार की तरह..........

37 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर कविता इमरान जी .. आपकी इस रचना की प्रविष्टि कल रविवार ब्लॉग प्रसारण http://blogprasaran.blogspot.in/ पर भी .. कृपया पधारें ..

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया शालिनी जी हमारे ब्लॉग की पोस्ट यहाँ शामिल करने का।

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  2. वाह इमरान भाई! सुभान-अल्लाह! बेहद खूबसूरत पंक्तियाँ। पढ़के मन को सुकून सा मिला।

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  3. हाँ! हम खुद में ही ऐसे कैद रहते हैं कि बरसते नेमत से भी खुद को बचाते रहते हैं.. बहुत अच्छी लगी रचना और भाव..

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  4. आहा ...एक बार बस उस बारिश का अनुभव हो जाए...यानि जन्म-जन्मान्तर की तृप्ति. बहुत बढ़िया इमरान भाई.

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  5. बहुत खूब....
    आज यहाँ भी बारिश आई है...

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    1. शुक्रिया दी.....बारिश के मज़े लो :-)।

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  6. बारिश का मज़ा ही अलग है,

    बहुत सुंदर, आभार

    यहाँ भी पधारे
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_5.html

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  7. ये बारिश लाई थी उसका ही पैगाम ... पर दिल की मायूसी ने उसे देखा नहीं ...
    गहरे एहसास ने शब्द ढूंढ लिए ... लाजवाब ...

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  8. वैसे तो जब से उत्तराखंड की बारिश टीवी पर देखी सुनी है तब से बारिश से दर लगने लगा है बावजूद इसके कि मुझे बारिश बेहद पसंद है मगर सही है बारिश कि बुँदे जब सुखी मिट्टी मेन गिरकर मिट्टी कि सौंधी सुगंध उड़ती है तो मन मयूर झूम ही जाता है इसलिए कभी कभी खुद को भूलकर इस बारिश का स्वागत कर ही लेना चाहिए क्या पता कल हो न हो। सुंदर रचना बधाई... :)

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  9. जहाँ सिर्फ बारिश ही नहीं बल्कि
    अल्लाह कि नेमतें बरसती हैं.
    अद्भुत भाव...भावविभोर करती बहुत सुन्दर रचना...

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  10. wah wah bahut bahut khoob.....jahan ki kothri,kya baat hein.

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  11. कहती थी पगली कि तुम्हें
    उस 'जहाँ' कि सैर कराऊँगी
    जहाँ सिर्फ बारिश ही नहीं बल्कि
    अल्लाह कि नेमतें बरसती हैं,
    क्‍या बात है !!!!! बहुत खूब !!!!!

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  12. बहुत ही सुंदर...प्रकृति ने मनुष्य को खुश होने के हर साधन जुटाए हैं...बस हम उन्हें समझ नहीं पाते!!

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  13. अपनी दीवारों से बाहर निकाल कर मन को मुक्त करने का आमंत्रण देती है वर्षा- सुन्दर संदेश !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया प्रतिभा जी ।

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  14. hmmmm...rchnaaa bdii dilkash lgii..pr rhii thi.ki..naam jana pehchanaa lgaa...are naam to jana pehchaana hi he...haan tasweer bdal di....hmmm
    bahut hii achhii rchnaa...
    kaafi waqt ke baad is aur aanaa huyaa...aapki utkrisht rchnaaprmke bahut acha lga
    take care

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    1. अच्छा लगा तुम्हारा ब्लॉग पर आना........इंशाल्लाह आगे भी आमद- दरफत बनी रहेगी ।

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  15. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ......!!

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया रंजना जी ।

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  16. बहुत सुन्दर शब्द
    पर हम उत्तराखंड वालो बारिश का नाम सुन डर लग रहा हैं।

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    1. हाँ, जो कुछ हुआ उसे देखकर ऐसा होना संभव है परन्तु नियति अटल है और हमे उसे स्वीकार करना ही पड़ता है ।

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  17. उस पगली पर भरोसा रखना इमरान जी
    वो बारिशे और दुआएँ फिर बरसेंगी

    बहुत प्यार भरी रचना !

    नई पोस्ट
    तेरी ज़रूरत है !!

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...