जून 17, 2014

पहला पैगाम



महबूब के नाम मैं 
पहला पैगाम लिखूँ, 

चूड़ियाँ वो खनकती 
पायल वो झनकती 
साँसे वो महकती 
या तेरी होठो के वो 
छलकते जाम लिखूँ, 

महबूब के नाम मैं 
पहला पैगाम लिखूँ, 

आँखों पर कहूँ ग़ज़ल 
चेहरे पर बुनूँ नज़्म
या हथेली पर सिर्फ 
एक तेरा नाम लिखूँ, 

महबूब के नाम मैं 
पहला पैगाम लिखूँ, 

हाथों में लिए हाथ 
देर तक होती बात 
कितना हंसी वो साथ 
वो गुजरी शाम लिखूँ, 

महबूब के नाम मैं 
पहला पैगाम लिखूँ, 

दिल के अरमान
इश्क़ के फरमान
नज़र वो मेहरबान 
कैसे सरेआम लिखूँ, 

महबूब के नाम मैं 
पहला पैगाम लिखूँ,

© इमरान अंसारी


10 टिप्‍पणियां:

  1. इश्क के रस में सराबोर सुंदर रचना...

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  2. बहुत बेहतरीन प्रेमपत्र पैगाम .....

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  3. बहुत बेहतरीन प्रेमपत्र पैगाम .....

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  4. वाह..बहुत भावपूर्ण रचना...लाज़वाब

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  5. इतना खूबसूरत पैगाम .. हाँ! ख़ास महबूब है ...नहीं है आम..

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  6. प्रेम का झरना स बह रहा हो जैसे ... बहुत ही खूबसूरत पैगाम .. कौन न मर जाए इस सादा अदायगी पर ...

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  7. हम जानते हैं कौन है वो ... :-) लिखो लिखो इतना खास और खूबसूरत पैगाम लिखना ही चाहिए :)

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  8. इमरान भाई, आपका यह 'पहला पैगाम'... बहुत अच्छा लगा.

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  9. बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
    बधाई मेरी

    नई पोस्ट
    पर भी पधारेँ।

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...