जनवरी 22, 2013

सफ़र



जितना पास गया मैं उतनी ही दूरी बढ़ती रही 
जिंदगी सिवाय सफ़र के और कुछ भी नहीं,

न रखना कभी किसी से कुछ पाने की उम्मीद 
लेना जानते हैं लोग यहाँ, देने को कुछ भी नहीं, 

उमर बिता दी जिसने जीतने में दुनिया सारी
क्या लेकर गया सिकंदर यहाँ से कुछ भी नहीं,

मैं कैसे दावा कर दूँ मसीहाई का ए ! दोस्त  
खुद मेरे दामन में दर्द के सिवा कुछ भी नहीं, 

ले अपने आगोश में कर मुझको फ़ना मेरे ख़ुदा 
बाकी बचे मेरा अब मुझमे निशां कुछ भी नहीं,

क्यूँ किसी हुस्न-ए-बुतां में ढूँढते हो तुम उसे 'इमरान'
हर ज़र्रे में नुमाया है वो उसके सिवा और कुछ भी नहीं,


39 टिप्‍पणियां:

  1. देने में अमीरी लगे मन की तब न देंगे ........ ग़ज़ल ने टुकड़े टुकड़े बहुत कुछ कह दिया

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  2. बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल ......हर शेर दूसरे पर भारी

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  3. सच यही है,खाली हाथ आये थे खाली हाथ जाना है ...बेतरीन ग़ज़ल... शुभकामनायें

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया संध्या जी।

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  4. क्या ले गया सिकंदर यहाँ से कुछ भी नहीं...यह समझ में आ जाये तो लेने की भाव दशा ही बदल जाती है..
    जीवन के यथार्थ का बोध कराती सुंदर गजल..आभार !

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    1. कुछ कुछ समझ आने लगा है अनीता जी :-)) ........शुक्रिया।

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  5. हरेक शेर लाजवाब है ... बेहद खूबसूरत गज़ल .... जिंदगी के राजों को खुलासा करती ...

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  6. बेहतरीन इमरान भाई. सारे शेर बहुत अच्छे लगे. और तो कुछ जाता नहीं साथ एक प्यार है जो जीते जी भी मिल जाए और मरने के बाद भी....बस वही है जो आपको जिंदा बनाये रखता है.

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    1. सही कहा .......शुक्रिया निहार भाई ।

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  7. खुद मेरे दामन में दर्द के सिवा कुछ भी नहीं,
    ले अपने आगोश में कर मुझको फ़ना मेरे ख़ुदा ....

    आप साबित कर रहे हैं ....
    तजुर्बे का ,उम्र से कोई नाता नहीं ....
    ख़ुदा आपको लम्बी उम्र से नवाज़े भाई ....
    ख्याति फैलती रहे .....
    आमीन !!

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    1. आमीन.....आप बाधों का आशीर्वाद बना रहे.........बहुत शुक्रिया दी ।

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  8. गहरी बातें सहेजे पंक्तियाँ .....हम सोचें तो....

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  9. बहुत सुंदर शेर,बेहतरीन गजल,,,,शुभकामनायें,,,

    recent post: गुलामी का असर,,,

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  10. Waah.. kya kavita likhi hai aapne imraan. main pehli baar aaya hu aapke blog par.. I have read only one poem and I already know that you are a skillfull and superb writer.. It would be a pleasure if you visit my blog sometime.. http://theoriginalpoetry.blogspot.in/

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    Deepak

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  11. अंतिम पंक्तियों बहुत ही जानदार है क्यूंकि सच यही है। :)

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  12. very very nice...
    harek sher lajawab hei imran ji,
    aap jo bhi likhte hein,wo khas hota hein..

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    1. आपकी सभी टिप्पणियों का तहेदिल से शुक्रिया......सब आप लोगों की ज़र्रानवाज़ी है ....हम किस काबिल हैं ।

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  14. दामन में जो दर्द है कोहिनूर से कम नहीं जिसे समेट भर लेने से ही आगोश में 'वो' आ जाता है .

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    1. सही कहा अमृता जी आपने अक्सर दर्द ही आँखें खोलता है ।

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  15. सच है हर ज़र्रे में नुमाया वह है...बहुत सुन्दर गहन भाव..बेहतरीन ग़ज़ल..

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  16. जो आया है उसे खाली हाथ ही जाना है ... फिर सिकंदर क्या ओर रंक क्या ..
    हर शेर गहरी बात बयान कर रहा है इमरान जी ...

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  17. Kabhi to kuch bhi nhi,kabhi sab kuch hai ye zindagi...yahi dastur hai,humara zinda hona kya ye sabut nhi ki hum zindagi ke jhamelon se dur hai...''
    Bahut hi umda rachna...

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  18. वाह .....उसके सिवा कुछ भी नही ....कुछ भी नही ....हर जर्रे में समय है वो .....

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...