सितंबर 16, 2013

इंतज़ार


ज़ख्म रिसने लगते हैं
दर्द बहने लगता है 
आँखे अश्कों में 
भीग जाती हैं आज भी,
जब-जब उस शब 
का ज़िक्र आता है 
जो तेरे इंतज़ार में गुजरी थी....... 

शब भर हौले-हौले चाँद 
फलक पर सरकता रहा 
सितारे थके हुए मुसाफिरों 
की तरह आसमान पर पड़े रहे,

दूर कहीं हवा से कोई 
पत्ता खड़कता था 
तो दिल की धड़कने 
कहती थी तुम ही हो,

दरिया के बहते हुए 
पानी की आवाज़ पर 
तुम्हारे पाज़ेब की झंकार
का गुमां होने लगता,

बहकी-बहकी सी हवा
कुछ यूँ छू के गुज़र रही थी 
जैसे तुम आकर मेरे बालों में 
उँगलियाँ फेर रही हो,

इन्हीं ख्यालों में कहीं गुम 
मैं तमाम शब तेरे आने 
का इंतज़ार करता रहा,
तेरे आने के गुमाँ होते रहे पर 
तूने आने की ज़हमत न उठाई,
नहीं जानता किसने तेरे पैर बाँधे 
वो तेरी मजबूरी थी या मरज़ी, 

चाँद भी आखिर अपनी मंजिल 
पर पहुँच ही गया और 
मुसाफिर सितारे भी एक-एक 
करके अपनी राह चलते बने,

और मैं उस शब को बाँध 
गठरी कंधे पर लादकर 
छोड़ आया था शहर तेरा 
आज भी जब कभी उस 
गठरी को खोलता हूँ तो..... 

ज़ख्म रिसने लगते हैं
दर्द बहने लगता है 
आँखे अश्कों में 
भीग जाती हैं आज भी,
जब-जब उस शब 
का ज़िक्र आता है 
जो तेरे इंतज़ार में गुजरी थी....... 


14 टिप्‍पणियां:

  1. ज़ख्म रिसने लगते हैं
    दर्द बहने लगता है
    आँखे अश्कों में
    भीग जाती हैं आज भी,
    जब-जब उस शब
    का ज़िक्र आता है
    जो तेरे इंतज़ार में गुजरी थी.

    सुंदर सृजन ! बेहतरीन प्रस्तुति, !!

    RECENT POST : बिखरे स्वर.

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  2. आज भी जब कभी उस गठरी को खोलता हूँ...वाह!

    खूबसूरत नज़्म।

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  3. ये ज़ज्बात..उफ़.. अपने दरिया में समेट रहा है.. कमाल..कमल..कमाल..

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  4. बहुत हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति इमरान जी .. वाह!

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  5. इमरान भाई! हैट्स ऑफ आपको भी. क्या समां बाँधा है आपने.

    चंद लम्हे निशात के, या उम्र भर की आजारी
    मुसलसल यादें उस शब की, जेहन में हैं तारी
    हयात भर शायद यूँ ही, तवाफ़ करे ख़यालों में
    इख्तियार कर चुका हूँ ताउम्र अलम से यारी

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  6. किसी का इंतज़ार कितनी यादें ओर टीस दे जाता है की उम्र भी कम पद जाती है उसे संभालते ...
    खूब्सूओरत बिम्ब ओर अलग अलग बिम्बों के माध्यम से दिल को छूने वाली नज़्म ने जमन लिया है ... बहुत ही लाजवाब है ...

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  7. इंतजार की इन्तहां हो गयी...बेहद खुबसूरत ! दिल के हालात को बयाँ करती सुंदर नज्म !

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  8. बहुत खुबसूरत यादों का कारवां.......!!
    जब कोई दिल के करीब होता है तो याद आना स्वाभाविक है....

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  9. यादों का हर गुजरता लम्हा शायद ऐसा ही होता है. खुबसुरत रचना के लिए बधाई.

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  10. आती जाती सुंदर समृतियाँ ....बहुत बढ़िया

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  11. सुंदर हाइकू सुंदर रचना, शुभकामनाये

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  12. आप सभी कद्रदानों का तहेदिल से शुक्रिया |

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  13. किसी का इंतज़ार और उसकी यादें ताउम्र दर्द दर्द देती रहती हैं...दिल को छूते बहुत भावमयी अहसास..बहुत सुन्दर

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...