कुछ सफ़र मंज़िल तक पहुँचने के लिए नहीं, बल्कि अपने पीछे छूटे हुए रास्तों को फिर
से देखने के लिए भी होते हैं।
साल 2010 में मैंने ये ब्लॉग शुरू किया था—“जज़्बात — दिल से दिल तक”।
उस समय शायद यह खयाल भी नहीं था कि इस नाम से शुरू हुआ एक छोटा-सा ब्लॉग, इतने बरसों बाद एक किताब का नाम बन जाएगा।
शुरुआत के दिनों में अपनी शायरी इसी ब्लॉग पर साझा किया करता था। जो कुछ दिल में आता, उसे अल्फ़ाज़ देता और यहाँ रख देता। धीरे-धीरे ग़ज़लें, नज़्में और अशआर इस ब्लॉग का हिस्सा बनते गए। समय आगे बढ़ता रहा, बहुत कुछ बदलता रहा, लेकिन वे अल्फ़ाज़ यहीं अपनी जगह बनाए रहे।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ तो यह बात अपने आप में बड़ी सुखद लगती है कि जिस नाम से 2010 में ब्लॉग शुरू किया था, उसी नाम से अब मेरी पहली शायरी की किताब प्रकाशित हुई है।
यह किताब मेरे लिए केवल कुछ रचनाओं का संग्रह नहीं है। इसमें उन वर्षों के कुछ एहसास, कुछ यादें, कुछ रिश्ते और कुछ अनकहे जज़्बात भी शामिल हैं, जिन्हें कभी शेर, कभी नज़्म और कभी ग़ज़ल का रूप मिला इसलिए इस किताब का इस ब्लॉग से एक रिश्ता हमेशा बना रहेगा। इस ब्लॉग पर मेरी कई पुरानी शायरियाँ आज भी मौजूद हैं। किताब के पन्नों में जो कुछ समेट पाया, वह इस लंबे सफ़र का एक हिस्सा है; बाकी अल्फ़ाज़ आज भी यहीं बिखरे हुए हैं।
आज खुशी है कि “जज़्बात — दिल से दिल तक” अब किताब की शक्ल में भी आपके सामने है।
किताब eBook,
Paperback और Hardcover में उपलब्ध है:
Kindle eBook
Amazon Paperback & Hardcover
Flipkart Paperback
https://www.flipkart.com/jazbaat/p/itm5351e162e48ab?pid=9798906737366&affid=editornoti
Notion Press Paperback
https://direct.notionpress.com/in/read/jazbaat-dil-se-dil-tak
अगर इन अल्फ़ाज़ में आपको अपना कोई एहसास, कोई याद या अपनी कहानी का कोई हिस्सा दिखाई दे, तो किताब को ज़रूर पढ़िएगा। पढ़कर अपनी राय भी साझा कीजिएगा। एक पाठक की सच्ची प्रतिक्रिया किसी भी लेखक के लिए बहुत मायने रखती है।
उन सभी दोस्तों, पाठकों और शुभचिंतकों का दिल से शुक्रिया, जिन्होंने इस सफ़र में कभी पढ़कर, कभी सराहकर और कभी हौसला देकर साथ दिया।
उम्मीद है कि आपका साथ आगे भी बना रहेगा और जज़्बात यूँ ही आगे चलता रहेगा। नया भी साझा होता रहेगा।
© इमरान अंसारी

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