फ़रवरी 20, 2013

अब के बहार



अब के बहार चुनर मोरी रंग दे......

तूने बख्शी तो दी मुझको ये कोरी 
मौला ! हो गई चुनर मोरी मैली, 

अब के बहार चुनर मोरी रंग दे...... 

दिखते रहे मुझे हर तरफ सब्ज़बाग़ 
साथ लगते रहे मोरी चुनरी में दाग, 

अब के बहार चुनर मोरी रंग दे...... 

हो मोरी चुनर में रंग हरा, पीला और लाल 
कितना बेचैन हूँ मैं, तू ही जाने मेरा हाल, 

अब के बहार चुनर मोरी रंग दे.......

रंगरेज़ मेरे ऐसे रंगियो कि रंग नहीं छूटे 
तुझसे लगी अब मेरी ये लौ नहीं छूटे, 

अब के बहार चुनर मोरी रंग दे.......

कर मुझ पर मेरे रंगरेज़ इतना सा अहसान 
तेरा था, तेरा है और तेरा रहेगा ये 'इमरान'

अब के बहार चुनर मोरी रंग दे.......

33 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात क्या बात क्या बात बहुत सुन्दर ग़ज़ल | आदाब :)

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  2. पी के रंग रंगों चुनरी ऐसी ...कि अब न चढे कोई रंग दूजा.... वाह सूफियाना मस्ती में रंगी रचना..बेहद सुन्दर!

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    1. बहुतt बहुत शुक्रिया शालिनी जी ।

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  3. कर मुझ पर मेरे रंगरेज़ इतना सा अहसान
    तेरा था, तेरा है और तेरा रहेगा ये 'इमरान',,,

    सुंदर अभिव्यक्ति

    Recent Post दिन हौले-हौले ढलता है,

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  4. रंग अनेक यहाँ बिखरे पड़े हैं
    उड़ जा न यार हुनर तू संग ले।

    सात रंग के सपने न देख प्यारे
    अबकी बहार चुनर तू रंग ले।

    :)

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    1. शुक्रिया देब बाबू.........आपकी सभी टिप्पणीयों के लिए आभार।

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  5. बहुत बहुत सुंदर ...... मन गहरे उतरते शब्द

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  6. आज आपकी यह रचना पढ़कर वो गीत याद आ गया "रंग दे मुझे रंग दे रंग दे....मुझे रंग दे हाँ अपनी प्रीत विच रंग दे ...:)

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  7. वाह इमरान भाई ..बहुत खूब. रंगरेज़ अगर रंग दे एकबार ठीक से तो फिर उजाले ही उजाले ज़िन्दगी में.

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    1. यही तमन्ना है.....शुक्रिया निहार भाई।

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  8. लगा जैसे सारे बोल गूंज रहे हैं .......... बहुत अच्छा लगा

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  9. "मोहे अपने ही रंग में रंग दे..."
    बहुत खूबसूरत....

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  10. ए! रंगरेज़ , कौन सा रंग घोला तूने कि दिल तेरे संग गाने लगा..

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    1. तू भी अपनी चुनर रंग ले........शुक्रिया अमृता जी।

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  11. रंगरेज तो हाथ में रंग लिए ही बैठा है..बहुत सुंदर प्रार्थना दिल की गहराई से उपजी..

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  12. बहुत खूब ... उस एक के रंग में रंगने की आशा ... जो सबको रंगता है अपने रंग में ... काश वो रंगरेज एक नज़र देख ले फिर रंग दे किसी भी रंग में ... बार चुनर मेरी रंग दे ...

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया दिगंबर जी।

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  13. तूने मुझ पे ऐसा रंग डाला ओ ललारी
    मैं हो गई तेरी सारी दी सारी !!

    बहुत सुंदर

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  14. अंतिम दो टुकड़े बहुत ही गहरे दिल में उतरते ...और ये भाव चिर स्थाई बने रहे ....तुम्हारे हमारे मन में ...और क्या चाहिए ....खूबसूरत ...एकदम सूफियाना

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    1. अंजू तुम्हारी सभी टिप्पणीयों के लिए तहेदिल से शुक्रिया।

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...