मई 02, 2013

बदलाव



वो रात के चमकते हुए सितारे हों 
या दिन में तपता हुआ सूरज
वो सुबह की मखमली ओस हो 
या आसमान से गिरती बारिश 

वो सदा बहता हुआ दरिया हो 
या फिर अटल खड़े हुए पर्वत,
वो फूलों की महकती खुशबू हो 
या सुलगती हुई चिता की राख,

बस हर, तरफ हर ओर यही देखा मैंने 
इस क़ायनात में कुछ भी क़ायम नहीं,
बदलाव ही बदलाव है यहाँ सब तरफ
एक चीज़ मिटती है तो दूसरी बनती है,

पल भर में विश्वास बदल जाते हैं 
एक ठोकर में श्रृद्धाएँ डगमगाती हैं,
कहीं भी नहीं रुकता है ये सिलसिला 
जो आज है वो कल नहीं रहता है,

निशानियाँ ही निशानियाँ बिखेरी है 
मेरे रब ने बन्दे के लिए दुनिया में, 
ताकि इंसान को सदा ये याद रहे कि
इस क़ायनात में कुछ भी क़ायम नहीं, 


19 टिप्‍पणियां:

  1. सच कहती खूबसूरत शायरी ....

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  2. इन निशानियों से मुंह फेर कर सब चलते है
    व थानेदार ले जाता है तो बस हाथ मलते हैं..

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  3. बिल्कुल सही कहा इमरान

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  4. बिल्कुल सही लिखा है आपने ... कायनात में कुछ भी कायम नहीं रहता ...परिवर्तन ही जीवन का नियम है

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  5. बस इतना समझने तो बात ही क्या ? गहरी अभिव्यक्ति

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  6. निशानियों पर भी तो हमारा ध्यान नहीं जाता..वरना हर शै में छुपा रब नजर आता

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  7. सच्चे ख़याल इमरान भाई...समय क्या नहीं कर देता...कभी हमारा अस्तित्व भी नहीं था इस धरती पर...कभी डायनासोर भी होते थे यहाँ.

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  8. बदलाव ज़रूरी है .....यही सृष्टि का नियम है ..न होता ...तो एक सड़ांध भर जाती .....और नयी कोपलें गर्भ में ही दम तोड़ देतीं

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  9. bahur ahem kirdar hai 'badlaav' jinagi ka...jivan ki nirasta mein ye ek ummid ki kiran jaisa hai...imraan ji aapne bhi is kirdar ko bakhoobhi dhala hai lafzon mein :)

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  10. वाह!!! बहुत ही बढ़िया भाव संयोजन परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है सार्थक एवं सुंदर भावभिव्यक्ति...

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  11. सच कहा है .. कुछ भी कायम नहीं ... पर फिर भी मेरा मेरा का रोना लगाए रहते हैं सब ...

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  12. बदलाव प्रकृति का नियम है...बहता पानी ही नदी है, वरना तालाब का दूषित पानी..बहुत सुन्दर और प्रभावी अभिव्यक्ति...

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  13. Jis chijh me jaan ho use badlna tay hai...
    Sundar chitran...

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  14. बहुत खूब....
    जिंदगी का सार यही है...
    बाकी सब निस्सार.....!!

    proud of you Bro......!!

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  15. आप सभी लोगों का तहेदिल से शुक्रिया ।

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  16. इस कायनात में कुछ भी कायम नही ......सिवाए उस के ....और .....जो उसे पा लेता है ...वो भी कायम हो जाता है उसके साथ ....इंसान की फितरत बदलना है ...तभी प्रकृति रंग बदलती है ....

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...