अगस्त 17, 2013

पूरे चाँद की अधूरी रात



वो पूरे चाँद की एक अधूरी सी रात,
जो जिंदगी में ठहर सी गई है,  

वो दरिया का किनारा 
पूरे चाँद की नीली सी रौशनी 
जो दरिया के पानी पर हिचकोले लेती 
दूर तक तैरती चली जाती थी,

उसके साथ-साथ वक़्त 
और हम भी बहते रहे, 
इस एक आखिरी मुलाक़ात में 
एक लम्बी ख़ामोशी के दरमियाँ 
तुम्हारे होंठ कुछ कहने के लिए 
कई बार काँपते रह गए,

और मैं जान के भी अनजान 
गुमसुम सा पानी के उठते 
बुलबुलों को एकटक देखता 
दिल में उनकी लम्बी जिंदगी 
की दुआ माँगता रहा…….

हमारा प्यार भी तो ऐसा ही था,
वक़्त का तेज़ बहाव आज इसे 
अपने साथ बहा ले जाएगा,
लरज़ते हाथो से तुमने अपना 
हाथ मेरे हाथ में लेकर 
हमेशा के लिए विदा माँगी थी,

उस रोज़ तुमने कहा था 
हम इस दरिया के दोनों 
किनारे जैसे ही हैं जो...... 
एक दूसरे के बिना मुक़म्मल नहीं 
एक दूसरे से जुदा भी नहीं,
पर जिनका कभी मिलन नहीं होता, 
  
वो पूरे चाँद की एक अधूरी सी रात,
जो जिंदगी में ठहर सी गई है,  

       

19 टिप्‍पणियां:

  1. पूरे चाँद की अधूरी सी रात..तुझे सलाम।

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  2. एक दूसरे से जुदा भी नहीं,
    पर जिनका कभी मिलन नहीं होता,
    वो पूरे चाँद की एक अधूरी सी रात,
    जो जिंदगी में ठहर सी गई है,,,,

    वाह बहुत सुंदर रचना,,,
    RECENT POST: आज़ादी की वर्षगांठ.

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  3. अधूरी रात की भावपूर्ण तस्वीर खींची है आपने

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  4. जज्बात भरी प्रेममयी सुंदर रचना !!

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  5. बेहतरीन रचना है इमरान भाई. एक-एक पंक्ति सीधे दिल पर उतरती चली गयी.

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  6. पूरे चाँद की ये अधूरी सी रात ...
    दिल को छू के गुज़रते हुए जज्बात ...
    गहरे मचल जाते हैं कुछ ख्वाब ...
    ये समुन्द्र के दो किनारे ....
    जो मिलने को हैं बेताब ...

    मज़ा आ गया इमरान साहब ...

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  7. वाह..बहुत ख़ूबसूरत...रचना के अहसास अपने साथ बहा ले जाते हैं...

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  8. पूरे चाँद की रात अधूरी और बात पूरी...दो किनारे जो कभी नहीं मिलते...बहुत ही सुंदर रचना !!

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  9. अनुपम भाव संयोजन ....

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  10. इस अधूरी सी रात ने पलकों को भिंगो दिया..

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  11. hmmmmmmm.................bahut pyaari ..........bhige se ehsaas..mithe se ehsaas........bahut hi mithaas bhri he...........

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  12. किनारे .....
    एक दूसरे के बिना मुकम्मल नहीं....
    और जिनका मिलन भी कभी नहीं होता....!
    बहुत खूब...!!

    एक रोमांस...
    एक रोमांच...
    एक दर्द...
    एक प्यार...
    एक अधूरे प्रेम की मुकम्मल दास्ताँ.....!!

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  13. शानदार रचना...भावपूर्ण।।।

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  14. दो किनारों से हम
    एहसासों का प्रवाह - हम एक दूसरे को महसूस तो करते हैं
    ………….
    बहुत ही गहरे एहसासों का समंदर

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  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार- 25/08/2013 को
    वो शहीद कहलाते हैं ,,हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः5 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

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  16. आप सभी लोगों का तहेदिल से शुक्रिया |

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जो दे उसका भी भला....जो न दे उसका भी भला...